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”आईवीएफ तकनीक किसी वरदान से कम नहीं’’ –डॉ. अर्चना धवन बजाज

”आईवीएफ तकनीक  किसी वरदान से कम नहीं’’ –डॉ. अर्चना धवन बजाज

किसी भी महिला के लिए मां बनना सबसे सुखद एहसास होता है, लेकिन जब कोई महिला इस सुख से वंचित रह जाती है तो उसे अपना जीवन ही अधूरा सा लगने लगता है। आईवीएफ ऐसी ही एडवांस्ड तकनीक है जो किसी भी महिला को मातृत्व सुख प्रदान कर सकती है। इस तकनीक के विषय में विस्तारपूर्वक बातचीत की उदय इंडिया की संवाददाता प्रीति ठाकुर ने ‘दा नर्चर क्लिनिक’ की डॉक्टर अर्चना धवन बजाज से जो आईवीएफ स्पेशलिस्ट हैं। प्रस्तुत हैं इस वात्र्ता के प्रमुख अंश।

आईवीएफ क्या है और यह कितनी कारगर है?

आईवीएफ का मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन है जो टेस्ट टयूब बेबी होता है। इसमें एक महिला के शरीर से उसके एग्स कोबाहर निकाल कर उसे स्पर्म के साथ फर्टिलाइज कराया जाता है। इसके बाद भ्रूण के विकास की जो शुरूआती प्रक्रिया होती है उसे लेबोरेटरी में विकसित किया जाता है। और फिर महिला के शरीर में मौजूद मेट्रा (बच्चेदानी) में इसे वापस सावधानीपूर्वक रख दिया जाता है। जिन लोगों को प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने में समस्या आती है उनके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। इस प्रक्रिया के जरिये जो महिलाएं प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं कर सकतीं वह भी संतान प्राप्त कर सकतीं हैं। इस प्रक्रिया के जरिए लगभग 40-45 प्रतिशत ऐसी महिलाएं  गर्भधारण कर पाती हैं जो प्राकृतिक रूप से सक्षम नहीं हैं।

आईवीएफ किस उम्र की महिलाओं के लिए उपयोगी होता है? 

आईवीएफ प्रक्रिया का उपयोग 25 साल की उम्र से लेकर किसी भी उम्र की महिला के लिए उपयोगी हो सकता है। लेकिन प्राय: जो महिलाएं 30 साल की उम्र तक कंसीव नहीं कर पाईं हैं उन्हें डॉक्टर के पास विजिट करनी शुरू कर देनी चाहिए। अगर 30 के बाद कंसीव नहीं किया है तो चैक किया जाता है कि महिलाओं में अपने एग्स बन रहे हैं या नहीं। जिन महिलओं के अपने एग्स बन रहे हैं उनका आईवीएफ अपने एग्स से हो सकता है और जिनके अपने एग्स नहीं बनते जैसा कि 40-45 वर्ष की महिलाओं में अकसर ऐसी समस्या देखी जाती हैं, तो उनके लिए डोनेटिड एग्स का प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक मेंउम्र की कोई सीमा नहीं है। लेकिन उम्र अधिक हो जाने पर जैसा कि बताया 40-45 के बीच अक्सर ऐसी समस्याएं हो जाती हैं तो इस तरह की महिलाओं के लिए ये अधिक कारगर तरीका है जिसे अपनाकर वह गर्भधारण कर सकती हैं।

आईवीएफ तकनीक का प्रयोग कब करना चाहिए?

28-08-2016वह दम्पति जो लगातार एक साल या उससे ज्यादा वक्त से बच्चा पाने की कोशिश में है, लेकिन फिर भी कंसीव नहीं कर पा रहे हैं ऐसे दम्पति इंफरटाइल कहलाते हैं। ऐसे दम्पतियों को आईवीएफ स्पेशलिस्ट के पास जाना चाहिए। ज्यादातर ऐसी संख्या 6 में से 1 होती है जिसे कंसीव करने के लिए किसी तरह की मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ती है। ऐसे लोग बेसिक मेडिकेशन से लेकर एडवांस्ड तकनीक जैसे-आईवीएफ, फिक्सी, पीजीडी, ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर, असिस्टेड हैचिंग, इनमें से कुछ भी हो सकता है। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो समान्यता: दवाईयों से ही कंसीव कर सकते हैं, कुछ लोग इंजेक्टेवल से कंसीव करते हैं, जबकि कुछ लोग आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन  से कंसीव करते हैं। कुछ दम्पति ऐसे भी होते हैं जो इससे भी एडवांस्ड तकनीक से कंसीव कर पाते हैं जैसे  लैपरोस्कोपिक सर्जरी जिसे कीहोल सर्जरी भी कहते हैं। ये ऐसे लोग होते हैं जिन्हें आईवीएफ या एडवंस तकनीक की जरूरत पड़ती है। तो इनफर्टिलिटी का लेवल दवाईयों से लेकर आईवीएफ तक कहीं भी रेंज कर सकता है। ये जरूरी नहीं है कि इस प्रोसेस में 2-3 लाख का खर्चा होना ही है। ये जरूरी नहीं है कि ट्रिटमेंट लंबा ही हो, ऐसा भी हो सकता है एक महीने का ट्रीटमेंट व कुछ दवाईयों से ही रिजल्ट मिल जायें। या फिर दो-तीन महीने का ट्रीटमेंट, आर्टिफीसियल इनसेमिनेशन इनमें से कुछ भी हो सकता है जो आपके लिए रिजल्ट ओरिएंटिड हो सकता है। ये निर्भर करता है दम्पति की बॉडी में कंसीविंग पावर कितनी है।

अक्सर देखा जाता है कि एक बेबी हो जाने के बाद दोबारा कंसीव नहीं हो पाता, क्या ऐसी महिलाओं के लिए भी आईवीएफ उपयोगी है?

बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो एक बच्चा तो आराम से कंसीव कर लेते हैं लेकिन बाद में एग्स फोरमेशन नहीं होती या टूयब ब्लॉक हो जाती है या स्पर्म काउंट कम हो जाते हैं या हार्मोनल इम्बैलेंस हो जाता है तो ऐसे लोग भी आईवीएफ या जो तकनीक बताईं हैं उनमें से किसी का प्रयोग करके कंसीव कर सकते हैं।

क्या इस प्रक्रिया में महिलाओं को कुछ अलग तरह के कॉम्प्लिकेशन भी फेस करने पड़ते हैं?

कोई भी प्रोसीजर हो, सर्जरी हो या दवाईयां हो, हर किसी की अपने कुछ साइड इफेक्ट होते हैं, कुछ कॉम्प्लिकेशंस होते हैं। आईवीएफ में हाइपर-स्टिीमुलेशन, ट्यूबल प्रेगनेंसी हो सकती है, मिसकैरेज रेट नॉर्मल पॉपुलेशन से ज्यादा हो सकता है। जो दवाईयां दी जाती हैं उनके टेम्परेरी साइड इफेक्टस होते हैं जैसे-वजन बढऩा, मूड स्विंग, ब्लोडिटनेश, एक्ने, कईयों को ब्रैस्ट टेंडेर्नस हो जाती है। इसी  तरह के छोटे-मोटे साइट इफेक्टस होते हैं। बाकी अगर सही तरीके से टेंरड डॉक्टर आईवीएफ करे तो ऐसी कोई कॉम्प्लिकेशन नहीं होती जो हेंडल न की जा सके।

जो महिलाएं आईवीएफ से भी कंसीव नहीं कर पाती हैं उनके लिए भी कुछ एडवांस टेक्नोलॉजी है?

जो महिलाएं आईवीएफ से भी कंसीव नहीं कर पाती हैं उनके लिए आईवीएफ विद एग डोनेशन के माध्यम से ऐसा संभव हो सकता है या फिर उनके लिए दूसरा रास्ता सेरोगेसी का है। ऐसे लोगों को सेरोगेसी के माध्यम से संतान सुख मिल सकता है।

इस प्रक्रिया में लगभग कितना खर्चा आता है?

इस प्रक्रिया में लगभग आने वाले खर्चे को डिफाइन कर पाना थोड़ा मुश्किल है। खर्चा वेरियस हेड में होता है। कुछ खर्चा जांच पर होता है, कुछ दवाईयों पर होता है, कुछ आईवीएफ के प्रोसेस का होता है। आईवीएफ का जो खर्च होता है वह प्रत्येक चरण का अलग-अलग होता है। इसमें ये बता पाना मुश्किल होता है कि किस चरण में लगभग कितना खर्च होगा। आईवीएफ की प्रत्येक प्रक्रिया का खर्च अलग है। औसतन प्रत्येक चरण का खर्च लगभग 1 लाख 20 हजार का होता है।

इस प्रक्रिया में जो होम प्रेगनेंसी टेस्ट करवाये जाते हैं वह नेचुरल प्रेगनेंसी टेस्ट जैसे ही होते हैं या कुछ अलग टेस्ट होते हैं?

दोनों ही तरीकों के लिए होम प्रेगनेंसी टेस्ट जरूरी हैं। लेकिन आईवीएफ में कंसीव हुआ है या नहीं कन्फॉर्म करने के लिए 16वें दिन या उसके बाद ब्लड टेस्ट या यूरिन टेस्ट करवाना पड़ता है, ताकि पता चल जाये कि कंसीव हुआ है या नहीं। वैसे तो प्रेगनेंसी टेस्ट एब्सोल्यूट हो गया है इस उद्देश्य के लिए। कन्फर्मेशन के लिए एक ब्लड टेस्ट होता है जिसे सीरम बीटा एचसीजी कहते हैं उसे करवाना चाहिए। ये टेस्ट 16 दिन का प्रोसीजर खत्म होने के बाद करवाना चाहिए, ताकि कन्फर्म हो जाये कि कंसीव हुआ है या नहीं।

आईवीएफ से पैदा बच्चे प्राकृतिक तौर पर पैदा हुए बच्चों जैसे ही होते हैं या उनमें कोई फर्क होता है?

नहीं, ऐसा कुछ भी फर्क नहीं होता बच्चे सामान्य ही होते हैं। बस कंसीव करने का तरीका अलग है और कुछ भी अलग नहीं है।

आपके क्लिनिक से अब तक कितने सफल आईवीएफ हो चुके हैं?

हमारे क्लिनिक से अब तक सात हजार सफल आईवीएफ हो चुके हैं।

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