ब्रेकिंग न्यूज़ 

नरेन्द्र मोदी की देशभक्ति

नरेन्द्र मोदी की देशभक्ति

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इन दो वर्षों की अवधि में केन्द्र सरकार के भिन्न-भिन्न मंत्रालयों ने प्रधानमंत्री जी के निर्देशानुसार किन-किन जनयोजनाओं पर सफलतापूर्वक पथ का निर्माण किया है उनका लेखा-जोखा जनता के सामने प्रस्तुत करने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। मुझे भी कुछ उत्तर पूर्वी राज्यों, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इन कार्यक्रमों के माध्यम से जन-सम्पर्क अभियान में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। देश की भौतिक प्रगति संतोषजनक रूप से देखने को मिल रही है, परन्तु इस सारे अभियान में मेरी दृष्टि श्री नरेन्द्र मोदी जी की देशभक्तिपूर्ण भावनाओं की खोज में लगी रही जिनके कारण इतनी व्यापक जनयोजनाओं का प्रभाव सारे देश में आज देखने को मिल रहा है।

देशभक्ति का अभिप्राय है अपने देश के प्रति समर्पण भाव तथा उस देश के लोगों की सांस्कृतिक विचारधारा के प्रति लगाव। देशभक्ति का सिद्धांत देशवासियों के कल्याण, समानता, न्याय और समाज के समग्र सुधारवाद की भावनाओं के साथ जुड़ा रहता है।

मुगल शासन के दौरान महापुरुषों, संतों और विशेष रूप से पंजाब की धरती से हमारे गुरुओं ने यदि गैर-मुस्लिम लोगों को मुस्लिम शासकों के अत्याचारों से मुक्त कराने का प्रयास किया तो उन्हें धार्मिक, आध्यात्मिक नेता होने के साथ-साथ देशभक्त नेता के रूप में भी स्वीकार किया जाता है। अत्याचारों से मुक्ति की अभिलाषा के कारण स्व-शासन की मांग उठती है।

ब्रिटिश सत्ता के दौरान जब देश में अन्धविश्वास और कुरीतियां प्रबल हो रही थीं तो महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने एक धार्मिक, आध्यात्मिक लक्षण के बावजूद सामाजिकता का लक्षण भी धारण किया और समाज सुधार के कार्यों के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन का प्रबल सूत्रपात किया।

कांग्रेस के पिछले 60 वर्ष के शासन में भ्रष्टाचार अपनी हदें पार कर चुका था। भ्रष्टाचार के कारण ही भारत की सारी अर्थव्यवस्था चरमरा रही थी। मंहगाई और सरकार की जनता के प्रति उदासीनता सर्वत्र व्याप्त थी। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव धूमिल होता जा रहा था।

एक राजनेता के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी ने सारे देश में भ्रष्टाचार से मुक्त आर्थिक सुधारवाद की बात की तो स्वाभाविक रूप से उन्हें भी जनकल्याण से जुड़ा एक देशभक्त  नेता स्वीकार किया गया। इस सुधारवाद को वे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में क्रियान्वित भी कर चुके थे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद की अवधि में उनकी देशभक्ति पूरे जोर से हिलोरे मारने लगी। अब सत्ता के बल पर वे अपनी देशभक्ति को सारे देश में ही नहीं, अपितु सारी धरती पर एक महान लक्षण के रूप में स्थापित करने के लिए जुट गये। भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ के नारे के साथ एक नया आर्थिक आंदोलन प्रारम्भ कर दिया। इसे लक्ष्य बनाते हुए उन्होंने एक के बाद एक विदेशी दौरे प्रारम्भ किये और भारी मात्रा में विदेशी निवेश को आकर्षित किया। श्री नरेन्द्र मोदी के विदेशी दौरों से आर्थिक साधनों के अतिरिक्त मुख्य लाभ यह भी हुआ कि विदेशों में रह रहे भारतीयों का गौरव अब आसमान को छूने लगा है। ऐसा महसूस किया जा सकता है कि धरती के किसी भी कोने में खड़ा व्यक्ति अब गर्व से कह रहा होगा, ‘हम भारतीय हैं’।

एक सच्चे देशभक्तनेता में अपने ईमानदार चरित्र और जनता के लिए न्याय की जो भावना होती है उसका प्रभाव सामान्य जनता पर भी पड़ता है। श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सम्पन्न नागरिकों से गैस सब्सिडी के सिलेंडर का त्याग करने की अपील की तो देश के करोड़ों उपभोक्ताओं ने इसका अनुसरण किया। इससे सिद्ध होता है कि श्री नरेन्द्र मोदी जनता के प्रत्येक कष्ट पर चिंतनशील हैं। इससे पूर्व स्व.श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश में अनाज की कमी के दृष्टिगत देशवासियों से एक समय का अन्न त्याग करने की भावुक अपील की थी, जिसके परिणामस्वरूप देश की कोटि-कोटि जनता ने उनकी भावनाओं का अनुसरण किया।

देशभक्ति के लिए समानता का पालन भी आवश्यक है। श्री नरेन्द्र मोदी ने कई बार अपनी भावनाओं को व्यक्तकरते हुए कहा कि ”मैं मन से हिन्दू हूं और मुझे इस पर गर्व है। परन्तु सबसे पहले मैं एक भारतीय हूं और मुझे अपने देश से बहुत प्रेम है। भारतवासियों के कष्टों का निवारण करते हुए मुझे कोई कष्ट नहीं होता और किसी प्रकार का भेदभाव भी मन में नहीं आता।’’ उनके यह विचार उन्हें एक सच्चे देशभक्त की श्रेणी में रखते हैं।

श्री नरेन्द्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जो पहली बार संसद में प्रवेश करते हुए प्रवेश द्वार पर इस प्रकार माथा टेकते नजर आये जैसे कोई अपने पूजा स्थल में प्रवेश करता है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि संसद और संसदीय व्यवस्था को अर्थात पूरे शासन तंत्र को वे एक पवित्र पूजा का कार्य ही मानते हैं। संसद के अंदर अपने पहले उद्बोधन में भी वे देशप्रेम की बात को लेकर आंसुओं में डूब गये। यह केवल सामान्य देशप्रेम नहीं है, अपितु श्री नरेन्द्र मोदी का देशप्रेम भावनात्मक रूप से अत्यंत प्रबल और मजबूत है।

श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को भी विपक्षी राजनेता औपचारिकतावश बेशक राजनीतिक पाखंड घोषित करते रहे हों, परन्तु इस अभियान के पीछे भारतवासियों के पूर्ण स्वास्थ्य की परिकल्पना छिपी है। भारत के नागरिक स्वास्थ्य और प्रसन्न रहें इस भावना से जुड़ा यह अभियान भी उनकी देशभक्ति को ही प्रगट करता है। श्री नरेन्द्र मोदी के बाल्यकाल का जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों में बीता है। 1962 के चीन युद्ध के दौरान उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर सैनिकों को खाने-पीने का सामान वितरित करने में भाग लिया और युवा अवस्था में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पंजाब के आतंक पीडि़तों के कल्याण के लिए काम किया। अपने जीवन के दो वर्ष उन्होंने हिमालय पर्वत में एक परिव्राजक के रूप में भी बिताये। उनकी जीवनगाथा यह सिद्ध करती है कि वे सदैव समाज के सेवक की तरह ही कार्य करते रहे हैं। इसी भावना का यह परिणाम है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने लाल किले की प्राचीर से अपने सेवक भावों को व्यक्त करते हुए कहा कि मैं अपने आपको प्रधानमंत्री नहीं अपितु प्रधान सेवक समझता हूं।

जब श्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका यात्रा पर गये तो पूरा समय उन्होंने नवरात्रों के व्रतों में ही बिताया। केवल नींबू पानी पर जीवन चलाने में सक्षम प्रधानमंत्री के इस प्रयास को भी भारतीय संस्कृति प्रेम और देशभक्ति के लक्षण से ओत-प्रोत समझना चाहिए।

विदेशों में जब भी कभी किसी भारतीय पर विपत्ति आती है तो प्रधानमंत्री के नाते उन्हें यह लगने लगता है कि यह विपत्ति भारतीयता पर है। यमन में जब हजारों भारतीय युद्ध के साये में जी रहे थे तो उन्होंने उन सभी भारतीयों के साथ-साथ लगभग 48 देशों के नागरिकों को मुक्त करवाकर यह सिद्ध कर दिया कि भारत राष्ट्र अपने नागरिकों की ही नहीं अपितु मानवता की रक्षा के लिए भी सक्षम है। देश की छवि के साथ-साथ उन्होंने भारत की संस्कृति की शान भी बढ़ाई है।

श्री नरेन्द्र मोदी सत्ता के माध्यम से व्यक्तिगत लाभ कमाने की मानसिकता से कोसों दूर हैं। व्यक्तिगत लाभ कमाने की मानसिकता ही देश के नेताओं को भ्रष्ट बनाती जाती है।

(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी के उपाध्यक्ष हैं)

अविनाश राय खन्ना

lobanovskiyfilяхтинг в Хорватии

Leave a Reply

Your email address will not be published.