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बसपा की नजर समाज पर

बसपा की नजर समाज पर

विधायकों की भगदड़, भाजपा का गेम-प्लान टू और कांग्रेसी हलचल देखकर बसपा प्रमुख फिर सावधान हो गईं हैं। उनकी निगाह एक बार फिर बहुजन समाज पर चली गई है। उधर स्वामी प्रसाद मौर्या 22 सितंबर को रमाबाई अंबेडकर मैदान भर देने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में बसपा प्रमुख सन्न हैं। हालांकि बसपा सुप्रीमों को पूरा भरोसा है कि  यह मौसमी ज्वार है जल्द ही चला जाएगा और हाथी चल कर विधानसभा में आएगा।



राहुल बाबा का प्रमोशन?


28-08-2016

राहुल बाबा ही कांग्रेस के नये अध्यक्ष होंगे। सोनिया गांधी के स्वास्थ्य होकर लौटने के बाद मुफीद समय देखकर  कांग्रेस कभी भी इसका संकेत देना शुरू कर देगी। राहुल के साथ प्रियंका भी सक्रिय राजनीति में आएंगी। बताते हैं उन्हें कांग्रेस अहम जिम्मेदारी देने के मूड में है। अब यह तय हो गया है और ऐसा कांग्रेस अध्यक्ष की अस्वस्थता को देखते हुए किया जा रहा है। खास बात यह है कि कोई भी कांग्रेसी इसको लेकर किसी चू-चपड़ के मूड में नहीं है।



राजन, राजन


28-08-2016

अपने आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन रिटायर हो रहे हैं। जब तक कार्यकाल रहा अपनी स्वायतता भोगी। अभी भी उसी मूड में हैं। ऊपर से सुब्रह्मण्यम स्वामी समेत अन्य से पंगा लेकर छाती पर मूंग दल दी है और राजन हैं कि घायल शेर की तरह पंजे के नाखून पैने कर रहे हैं। वहीं सरकार चाह रही है कि राजन बाबू चुपचाप  चले जाएं। अब देखिए आगे क्या होता है।



शिवपाल की सपा


28-08-2016

जब से मुलायम सिंह ने अखिलेश को उत्तराधिकारी बनाया है, शिवपाल के सीने पर सांप लोट रहा है। अखिलेश चुपचाप चचा राम गोपाल के साथ चचा शिवपाल का फैसला बदलवा देते हैं, जबकि चचा शिवपाल हैं कि बड़े भाई मुलायम के बाद सपा के संगठन पर जोरदार पकड़ रखते हैं। शिवपाल ने दूसरे दलों में भी जान-पहचान बढ़ानी शुरू कर दी है। ऐसे में गाहे-बगाहे शिवपाल समर्थक शिवपाल सपा के सपने देख ले रहे हैं। अब देखिए यूपी चुनाव के बाद क्या होता है? खबर तो यही है कि मुलायम की हांडी में जो पक रहा है, वह बाहर आएगा।



केजरी बाबू बताईए


28-08-2016

एक फुस-फुसाहट तेज हो चली है। दिल्ली के साथ-साथ पंजाब, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात में आम आदमी पार्टी का प्रचार अभियान काफी तेज हो गया है। टीवी, रेडियो, अखबार में जोर-शोर से केजरी डंका पीट रहे हैं। जबकि हैं दिल्ली के सीएम। किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर केजरी बाबू के पास इतना इफरात पैसा आ कहां से रहा है। आखिर वही केजरी बाबू हैं, जिन्होंने कहा था कि ‘आप’ पांच साल तक दिल्ली के बाहर नहीं देखेगी। जनता से किये वायदे पूरे करेगी और अब उसी से मुकर रही है।



क्या होगा कलराज?


28-08-2016

उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता कलराज मिश्र की चिंता बढ़ गई है। पीएम मोदी द्वारा 70 साल में सक्रिय राजनीति से रिटायर होने की नीति की दहलीज पर हैं और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कि तैयारियों पर कोई राय भी नहीं ली जा रही है। ऐसे में कलराज को कुछ समझ मे नहीं आ रहा है। ब्राह्मण नेता होने का ही सहारा है। सपना तो है कि एक बार ही सही यूपी के सीएम बन जाएं। न बन सके तो कैबिनेट में बने रहें। यह भी यदि संभव न हो पाए तो राजभवन ही मिल जाए। लेकिन सही कहा है- पुरूषस्य भाग्यम दैवो न जानामि।



ऊहापोह में वरूण


28-08-2016

वरुण गांधी खासे परेशान हैं। परेशान वरुण ही नहीं प्रियंका भी हैं। युवा वरुण खुद को यूपी का मजबूत नेता समझते हैं। पिता संजय और मां मेनका की मेहनत भी साथ है, लेकिन टीम अमित शाह इसे कुछ नहीं समझती। केशव मौर्या और स्वामी प्रसाद को ही भाव देने में जुटी हैं। अपना एहसास कराने के लिए ही वरुण ने इलाहबाद में अपना जोरदार काफिला उतार दिया था, लेकिन यहां तो टीम शाह गांधियों को काबू में करने में लगी हैं। ऐसे में वरुण बाबा को समझ में ही नहीं आ रहा है कि करें तो क्या? दिक्कत यह भी है कि संघ के नेता भी केवल सुनकर चुप्पी साथ ले रहे हैं।



कथा अनंता


28-08-2016

हरि अनंत, हरि कथा अनंता। जी हां बात अनंत कुमार की हो रही है। जब से संसदीय कार्य मंत्रालय का जिम्मा आया है, खासे सक्रिय हैं। बताते हैं मानसून सत्र में भी पूरा दम दिखा दिया था। जीएसटी पास कराने में लगे रहे और झंडा गाड़ दिया। वैसे भी टीम आडवाणी के पुराने रणनीतिकार हैं। फ्लोर प्रबंधन की कला में माहिर हैं, लेकिन हवा का रूख देखकर चुप थे। अब पर निकल रहे हैं और खबर है कि उडऩे को भी बेताब हैं।



 ईरानी जी इतिहास हैं


28-08-2016

एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर वर्तमान हैं और फायर ब्रांड ईरानी इतिहास। मंत्रालय के ऑफिसर भी इससे न केवल खुश हैं, बल्कि बदले माहौल में उन्हें काम करने का आनंद आ रहा है। जावड़ेकर है कि बेहद ठंडा करके खाते हैं, लिहाजा मंत्रालय में अब शांति लौट आई है। मजे की बात यह भी है कि ऑफिसरों की सलाह और अपने विवेक का इस्तेमाल करके जावड़ेकर ने चुपचाप मैडम के विवादित फैसलों को पलटने का निर्णय तेज कर दिया है। वहीं, मैडम हैं कि कपड़ा मंत्रालय से ही एचआरडी पर निगाह गड़ाए हैं। कभी-कभार अधिकारियों से कुशल-क्षेम भी पूछ ले रही हैं।


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