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अमृत है गौ माता का दुग्ध

अमृत है गौ माता का दुग्ध

भारतीय देसी गाय के दूध को अमृत समान माना गया है। यदि पृथ्वी पर किसी भी खाद्य पदार्थ को संपूर्ण और सर्वोत्तम माना गया है तो वह गाय का दूध ही है। भारतीय गाय के दूध में वह सभी पोषक तत्व मौजूद हैं जो हमें विभिन्न भोज्य पदार्थों से प्राप्त होते हैं। मात्र गाय के दूध को पी कर ही व्यक्ति कई दिनों तक स्वस्थ्य और ताकतवर बना रह सकता है। किसी शीशु के लिये मां के दूध के बाद गाय का ही दूध है जो उसे सभी पोषक तत्व प्रदान कर सकता है। देसी गाय के दूध में आठ प्रकार के प्रोटीन, 6 प्रकार के विटामिन, 21 प्रकार के एमिनो एसिड, 11 प्रकार के चर्बीयुक्त एसिड, 25 प्रकार के खनिज तत्व, 16 प्रकार के नाइट्रोजन यौगकि, 4 प्रकार के फास्फोरस यौगिक, 2 प्रकार की शर्करा, इसके अलावा मुख्य खनिज सोना, तांबा, लोहा, कैल्शियम, आयोडीन, फ्लोरिन, सिलिकॉन आदि पाई जाती हैं।  इन सभी तत्वों के पाये जाने के कारण ही देसी गाय का दूध एक उत्कृष्ट प्रकार का रसायन है, जो शरीर में पहुंच कर रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य को समुचित मात्रा में बढ़ाता है।

यह पित्तशामक, बुद्धिवर्धक, और सात्विकता को बढ़ाने वाला है। गाय के दूध से कोलेस्ट्रोल बढऩे का खतरा भी नहीं रहता।

भारतीय नस्ल की गाय की रीढ़ की हड्डी में सूर्यकेतु नाड़ी होती हैं। सूर्य की किरणे जब गाय के शरीर को छूती हैं, तब सूर्यकेतु नाड़ी सूर्य की किरणों से सोना बनाती हैं। इसी कारण गाय के दूध और मक्खन में पीलापन होता है, गाय का दूध पीने से शुद्ध सोना शरीर में जाता हैं। गाय के दूध में विषनाशक तत्व होते हैं। यदि गाय कोई विषैला पदार्थ खा जाती है तो भी उसका प्रभाव उसके दूध में नहीं आता। गाय के शरीर में समान्य विष को पचाने की अद्भुत क्षमता होती है। ये जहर गाय के गले में नीचे लटकने वाले मांस (गलाकंबल) में ही रह जाता है। एक शोध के मुताबिक देसी गाय और अमेरिकन गाय को भोजन में थोड़ा-थोड़ा जहर दिया गया, जब उनका दूध निकाला गया तो देसी गाय के दूध में जहर का कोई प्रभाव नहीं देखा गया, जबकि अमेरिकन गाय के दूध में वही जहर पाया गया जो उसे खिलाया गया था। इन सभी कारणों से देसी गाय के दूध को अमृततुल्य माना जाता है।

  • पेट के कैंसर को शुरुआती दौर में रोकने के लिये देसी नस्ल की गाय का दूध बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। गाय का दूध कैंसर की कोशिकाओं को बढऩे से रोकता है। ट्यूमर को बढ़ाने वाले बेसिलन के प्रभाव को कम करने में दूध के पौष्टिक तत्व अहम भूमिका निभाते हैं। गाय के दूध में ए1 जीन पाया जाता है जो दिमाग के विकास के लिये महत्वपूर्ण है।
  • गाय के दूध में 5 पीपल डालकर गर्म करके सुबह-शाम पीने से फेफड़ों की कमजोरी दूर होती है।
  • गाय के ताजे दूध में नींबू का रस निचोड़ कर लगातार 5 से 6 दिन तक पीने से बवासीर ठीक हो जाता है।
  • हकलापन दूर करने के लिये 10 ग्राम दूध में 250 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर रख लें। 2-2 ग्राम चूर्ण दिन में 2 बार मक्खन में मिला कर खाने से हकलेपन से निजात मिलती है।
  • गाय के दूध में 50 ग्राम ब्राह्मी रस को मिलाकर दिन में 3 बार लेने से दिमागी रोग ठीक हो जाते हैं और याददाश्त मजबूत होती है।
  • ह्दय रोगी के लिये गाय का दूध व घी फायदेमंद है इसलिये भोजन में इनका इस्तेमान नियमित करना चाहिए। गाय का दूध अन्य पशुओं के दूध से कहीं बेहतर और फायदेमंद है अत: आज कल के जीवन में आने वाली तमाम तरह की बीमारियों से बचने के लिये लोगों को गाय के दूध, दही, घी आदि का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि निरोगी काया प्राप्त हो सके।

प्रीति ठाकुर

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