ब्रेकिंग न्यूज़ 

खुद को विवेक के आईने में मापें

खुद को विवेक के आईने में मापें

हम जो भी कार्य करते हैं उसे पूरी दुनिया से छुपा सकते हैं। हम दूसरों के सामने साधू बनने का नाटक भी कर सकते हैं। लेकिन जब हमें खुद का सामना करना पड़ता है उस वक्त हम हार मान जाते हैं। इस दुख को हम दूसरों के साथ बांट भी नहीं पाते हैं। हमारे गलत काम करने पर हमारे अंदर से जो प्रश्न उठते हैं उसका जवाब देना हमारे लिये बहुत कठिन हो जाता है। हमारे जवाब के ऊपर ही हमारे परिणाम निर्भर करते हैं। हमारे गलत कार्यों का जवाब देना हमारे लिये बहुत मुश्किल हो जाता है। गलत कार्य करने वाला व्यक्ति हमेशा असंतोष की भावना के साथ जीता है। ऐसे लोग किसी भी परिस्थिति में आसानी से खुद को सहज महसूस नहीं करते हैं। हर किसी के साथ ऐसे लोगों का बर्ताव कठोर होता जाता है, क्योंकि वे अंदर से अपने गलत कामों की वजह से हमेशा विचलित रहते हैं। इस वजह से आगे आने वाले कार्यों को भी आसानी से नहीं कर पाते हैं उसमें भी गड़बड़ी हो जाती है। लेकिन जो लोग अच्छे कार्य करते हैं जब वे अपने मन के द्वारा उठाये गये प्रश्नों का उत्तर देना शुरू करते हैं तो उनका खुद ही के मन के सामने सम्मान बढ़ जाता है। ऐसे लोग सदा संतुष्ट भाव से जीते हैं। उनके मुख से अपूर्व आभा निकलती है। उनका कार्य सदैव सकारात्मक होते हैं। ऐसे लोग खुद को अपने मन रूपी साम्राज्य का सम्राट मानते हैं, उनका संतोष भाव ही उन्हें दूसरों से भिन्न करता है। हमें अच्छा या बुरा कोई भी कार्य करने से पहले सौ बार सोचना चाहिए। क्योंकि जब हमारे अंत:करण की आवाज हमसे अच्छे या बुरे कर्मों के जवाब मांगती है तो उसका उत्तर हमें स्वयं देना होता है, और इस पर ही हमारा पूरा जीवन निर्भर करता है।

एक विद्यार्थी का सबसे महत्वपूर्ण समय है परीक्षा। न केवल यह समय उसके जीवन में महत्व रखता है, बल्कि यह समय उसके लिये एक कठिन घड़ी भी होती है। विद्यार्थी कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो लेकिन जब परीक्षा का समय निकट आता है, तो वह चिंतित हो जाता है। परीक्षा के परिणाम से न केवल परीक्षक को बल्कि, आस-पास के लोगों को भी पता चल जाता है कि विद्यार्थी का ज्ञान कितना है। ऐसा भी देखा जाता है कि विद्यार्थी से अधिक उसके परिणाम को जानने की इच्छा उसके जानने वालों को होती है। परीक्षा के द्वारा यह सामने आ जाता है कि विद्यार्थी ने अपने जीवन में कितनी विद्या अर्जित की है। परीक्षा देने वाला छोटा बच्चा ही क्यों न हो, लेकिन उसके परिणाम से उसके अपनों की भावनाएं जुड़ी होती हैं। छोटे बच्चों की परीक्षा से कोई गंभीर लेना-देना नहीं होता है साथ ही छोटे बच्चों का आंकलन करने का तरीका भिन्न होता है। इन सभी परीक्षाओं को छोड़ कर एक परीक्षा अविरल हमारे अंदर चलती रहती है। उस परीक्षा के परिक्षार्थी हम हैं और परीक्षक भी हम खुद ही होते हैं। यह परीक्षा भी कुछ कम कठिन नहीं होती है। परीक्षार्थी अथवा हमारे द्वारा किया जाने वाले कार्य अथवा हमारे मन में आने वाले सच को दृष्टी में रखकर हमारा मन और विवेक उसके फल और प्रतिफल की घोषणा करता है। वह ज्ञात होता है तो केवल हमें खुद को उसका फल या प्रतिफल खुद को छोड़ कर किसी दूसरे को पता नहीं चलता है। अगर किसी को इसका आभास होता भी है तो केवल उन लोगों को जो हमारे चेहरे पर आने वाले संतुष्टि या असंतुष्टि के भाव पढ़ पाते हैं।

उपाली अपराजिता रथ

on in french translationairport hotel doha international airport

Leave a Reply

Your email address will not be published.