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नरेन्द्र भाई बनाम बनारसी भैया

नरेन्द्र भाई बनाम बनारसी भैया

काशी में एक नारा बहुत पॉपुलर है-‘हर-हर महादेव’। हर खुशी के मौके पर यह नारा लगाया जाता है। बनारसी लोग अल्हादित होने पर यह नारा लगाते हैं। किसी को सिर आंखों पर बिठाने जैसी भावना मन में आने पर हर -हर महादेव बोलते हैं। नरेन्द्र मोदी जब बनारस  से चुनाव लडऩे आये तब भाजपा के लोगों ने नारा लगाया ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी।’ काशी की जनता ने मोदी जी को विजयमाला पहनाकर उनको भरपूर सम्मान दिया। माना गया कि इस बार बनारस ने सांसद नहीं, प्रधानमंत्री जिताया है। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही काशी की जनता की हसरतें भी बढ़ गयीं। फिलहाल, अब जबकि मोदी जी का कार्यकाल सवा दो साल का बीत गया है, यह आकलन जरुरी हो गया है कि प्रधानमंत्री से काशी को क्या मिला। बनारसियों की हसरतें कितनी पूरी हुईं। मैली हो चुकी गंगा का कितना उद्धार हुआ? लगभग अवरुद्द हुई गंगा की धारा कितनी अविरल और निर्मल हुई? बदबूदार गलियों की सफाई कितनी हुई? सड़कें चलने लायक हुईं या पहले जैसी ही हैं। शहर की बदनाम ट्रैफिक व्यवस्था कितनी दुरुस्त हुई? पीने के पानी के लिए क्या लोग अब भी सुबह उठकर लाइन लगा रहे हैं? बिजली में कितना सुधार हुआ? बारिश में जल-जमाव, घाटों पर गंदगी से कितनी निजात मिली है? पानी, बिजली और सड़कों की दुर्दशा से पस्तहाल देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में हाल के वर्षों में आयी कमी रुकी या नहीं? बनारसी साड़ी उद्योग की बेहतरी के लिए क्या कुछ हुआ? क्या पूर्वांचल की बेरोजगारी दूर करने के लिए केन्द्र की ओर से कोई सौगात मिली? बनारस की इन समस्याओं और यहां के आम नागरिकों के हालात पर एक नजर डाल कर ही हम इस निर्णय पर पहुंच सकते हैं कि ‘हर घर’ या हर घर की दहलीज तक पहुंचने में कितने कामयाब हुए हैं मोदी?

इस मुद्दे पर पूरे बनारस के लोगों की एक राय तो हो नहीं सकती। अत: एक स्वर से लोग कहें कि मोदी जी ने जैसा कहा था, कर दिखाया, ऐसा नहीं है। हां, घाटों पर साफ-सफाई हुई है। वहां सुंदरीकरण के काम लगातार हो रहे हैं। फ्लड लाइटें तो पहले भी थीं, अब एलईडी के बल्ब बहुतेरे लग गये हैं। रिंग रोड का काम तेजी से हो रहा है। वह दिखता भी है। बाकी चीजें तो पाइप लाइन में बताई जा रही हैं। कहते हैं प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष और समाजवादी विचारक प्रो. सुरेन्द्र पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर हुए कई आंदोलनों में सक्रिय भागीदार रहे हैं। रिंग रोड के काम को सचमुच लोग सराह रहे हैं। लेकिन विकास से जुड़ी अन्य योजनाएं अभी जमींन पर दिख नहीं रहीं। इसीलिए लोगों में संशय है। शहर से सटे गांव वाजिदपुर के किसान राजदेव यादव कहते हैं -नेताओं के वादों का क्या? जैसे सबने वादे किए, मोदी जी ने भी किये। रिंग रोड के अलावा अभी कोई काम दिख नहीं रहा। किसानों के लिए तो कोई योजना  या कार्यक्रम समझ में नहीं आ रहा। बैंक के खाते भी नहीं खुले। जो खुले उनमें पैसे कब आयेंगे, पता नहीं। सस्ते बीज, सस्ती खाद किसान को चाहिए, वह नहीं मिल रही। खाद, बीज और कीटनाशकों पर सब्सिडी देने वाला किसान का हितैषी होगा, लेकिन वैसा कहां हो रहा है।


बहानेबाजी से काम नहीं चलेगा –अजय राय


11-09-2016बनारस को अपना संसदीय क्षेत्र बनाने से हालांकि भाजपाई मोदी जी से बेहद प्रफुल्लित हैं, लेकिन विपक्षी उतने ही कुपित हैं। इसी क्षेत्र से (संसद) लोकसभा का चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के विधायक (मौजूदा) अजय राय भाजपा और मोदी जी के खिलाफ बनारस को ठगने तक का आरोप लगाते हैं। वे कहते हैं भाजपा के जनप्रतिनिधि जनता को फेस करने से कतरा रहे हैं। पेश है अजय राय से बातचीत के प्रमुख अंश –

 

राय साहब, आप काशी की जनता के लिए बराबर लड़ते रहे हैं। लेकिन मोदी जी यहां से सांसद चुने गये। अब तक के उनके कामों से आप कितने संतुष्ट है?

उन्होंने किया क्या है, जिससे मैं या जनता संतुष्ट हों? भाजपा यहां के नगर निगम पर 30 साल से काबिज है। शहर का हाल देख लीजिए। बिजली, पीने का पानी, सीवर और जलभराव से, सड़कों की दुर्दशा से लोग त्रस्त हैं। बारिश के दिन हैं, गंदगी से गलियां बजबजा रही हैं। मोदी जी और उनके लोग नजर नहीं आ रहे। जनता प्रदर्शन कर रही है। मेयर लोगों से मिलने की बात कहकर भाग जा रहे हैं। यह तो बनारस के साथ ठगी हुई।

मोदी जी और भाजपा विधायकों से लिखित सवालों का जवाब तो आप मांग ही सकते हैं फिर अभी तक क्यों नहीं मांगा?

अरे, जब झूठे जवाब ही देने हैं तो हम क्या कर लेंगे। हमारे शैलेन्द्र सिंह कैन्टोमेंट बोर्ड के सदस्य ने आरटीआई से जवाब मांगा था। सब झूठे जवाब आ गये। क्या कर लीजियेगा? इनका मेयर जनता से भाग रहा है, तीनों एमएलए जनता का सामना करने से कतरा रहे हैं।

लेकिन मोदी जी तो क्षेत्र के प्रधानों को दिल्ली बुलाकर मिल रहे है?

प्रधानों को दिल्ली बुलाने से क्या होगा, समस्याएं तो यहां की हैं, उन्हें सुलझायें। दो साल में दो गांव गोद ले लेने से क्या होगा। पूरे क्षेत्र के गांव गोद लें, गरीबों का गांव गोंद लें। आखिर प्रधानमंत्री का क्षेत्र है, पांच साल में सिर्फ बनारस के गांव बिजली, पानी, सड़क और सिंचाई की समस्या से मुक्त न हुए, शहर में पीने के पानी के लिए लोग पांच बजे से लाइन लगायें, ट्रैफिक दो-दो घंटे जाम रहे, चौराहों पर कमर तक जल जमाव हो तो इसे क्या कहेंगे।

मेयर राम गोपाल मोहले और उत्तरी शहर के  विधायक रवीन्द्र जायसवाल कहते हैं कि बहुत काम हुआ है और लगातार हो रहा है। हां गति धीमी जरुर हो सकती है। वे प्रदेश सरकार की अड़ंगेबाजी को भी धीमी गति का एक कारण बताते हैं?

बहानेबाजी से काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री को जवाब देना होगा। काशी के लोग जवाब मांग रहे हैं। गंगा कितनी साफ हुई? बनारस में कितने पेड़ लगे? काशी कितनी ग्रीन हुई, कितनी स्वच्छ हुई? किस ‘नवरत्न’ ने कौन सी गली साफ  की? कौन सा मुहल्ला चमका -एक का नाम तो बता दें। झाड़ू लेकर फोटो खिचवाना एक बात है, सफाई दूसरी बात है। इस बार भाजपा को सब हिसाब देना होगा।

जो जीता वही सिकंदर मान लिया जाता है विधायक जी, क्या कहियेगा?

काशी की जनता बड़ी भोली है। काफी देर तक बर्दाश्त करती है, लेकिन उसकी भी एक हद है। इनकी सरकार में सहयोगी दल के पंजाब के एक मजीठिया जी हैं, वे काशी वालों को ठग रहे हैं। काशी की जनता बतायेगी कि ठगी करने वाले लोग कौन हैं?


Layout 1यह सच है कि जो कुछ दिखता है,उसी को जनता सच मानती है। बाकी बातें उनके हिसाब से हवा-हवाई होती हैं। भाजपा नेता और वाराणसी के मेयर राम गोपाल मोहले कहते हैं-किसी सांसद या विधायक के विकास कार्यों का आकलन तो चौथे -पांचवें साल में करना चाहिए। अभी तो योजनाएं आकार ग्रहण कर रही हैैं, पाइप लाइन में हैं। कुछ योजनाओं पर काम शुरु हो गया है, कुछ पर बारिश खत्म होते ही शुरु होगा। रिंग रोड प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है, उस पर तेजी से काम हो रहा है। वाराणसी से गोरखपुर, वाराणसी से गाजीपुर, वाराणसी से जौनपुर, वाराणसी से रीवा फोर लेन बनने लगी है। वाराणसी से मीरजापुर 6 लेन पर जल्दी ही काम शुरु होना है। इसके लिए केन्द्र ने परिवहन निगम को 20 हजार करोड़ रुपए दे दिये हैं। तो आप यह नहीं कह सकते कि काम नहीं हो रहा है। विकास गतिमान है। हां, पर गति धीमी है।

Layout 1भाजपा के उत्तरी वाराणसी से एमएलए  रवीन्द्र जायसवाल जो प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के स्थानीय कार्यालय में काम देखते हैं, का कहना है कि ‘लोग छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ बना देते हैं। मोदी जी पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। सिर्फ बनारस के नहीं। उनके आने से ही समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की शुरुआत हुई है। वाराणसी में ही देखिये, 12 अगस्त 2016 को जल परिवहन की ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी इलाहाबाद -हल्दिया जल परिवहन कार्य योजना का उद्घाटन नीतिन गडकरी जी ने किया है। अब जलमार्ग क्षेत्र में इस योजना के चलते अभूतपर्व विकास होगा। दो जलपोतों के जरिये 12 अगस्त को ही माल ढुलाई का काम शुरु हो गया है। इसके अलावा सात हजार करोड़ की चार योजनाओं की आधारशिला भी जल परिवहन मंत्री ने रखी। इन योजनाओं के जरिये 2 लाख युवाओं को रोजगार मिल सकेगा।


वे हमारे ‘बुरे दिन’ ही लौटा दें –सुरेन्द्र पटेल


11-09-2016

प्रधानमंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद वाराणसी में अपेक्षित विकास की झलक न दिखाई पडऩे से सपा और कांग्रेस भी आक्रामक रुख अपनाये हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जहां मोदी सरकार को ‘वादों की सरकार’ बताते हुए राज्य सरकार द्वारा किये गये कामों की फेहरिस्त पेश कर रहे हैं, वाराणसी संसदीय क्षेत्र की सेवापुरी विधानसभा सीट से जीते उत्तर प्रदेश के पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री सुरेन्द्र पटेल मोदी के ‘अच्छे दिन लायेंगे’ की खिल्ली उड़ाते हुए कहते हैं -’ भईया, आप हमें हमारे बुरे दिन ही लौटा दो, अच्छे दिनों से बाज आये।’ पेश हैं सुरेन्द्र पटेल से बातचीत के अंश-

 

विधानसभा क्षेत्र प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। जयापुर गांव को मोदी ने गोद लिया है और वहां के विकास के लिए केन्द्र के तीन मंत्री लगे हुए हैं। केन्द्र के अधिकारियों, पार्टी के नेताओं के दौरे भी विकास कार्यक्रमों की समीक्षा की दृष्टि से लगातार हो रहे हैं। आप की नजर में क्षेत्र का कितना विकास हुआ है?

जो कुछ हुआ है, उसकी अनदेखी कोई नजर नहीं कर सकती। आप भी चलिये, देख लीजिये। लेकिन वहां कुछ हुआ होगा, तब न। जयापुर में बातों के पहाड़ खड़े किये गये हैं। चकरोड़ों पर जो खडंज़े बिछाये गये थे, उनकी ईंटें तक नहीं दिख रही हैं। स्वच्छंता अभियान के लिए ‘नवरत्न’ बनाये थे। एक भी ‘रतन’ के दर्शन के लिये बनारस के लोग तरस गये हैं। गंदगी से पूरे बनारस में सड़ंध फैली है। अरे सफाई के लिए रतन नहीं, आदमी और मशीनें चाहिए होंगी। जनता सफाई के लिए टैक्स देती है। वह टैक्स भी दे और खुद ही सफाई करे, वाह भाईया वाह।

अपनी व्यस्तताओं के बावजूद प्रधानमंत्री कई बार बनारस आये। क्षेत्र के लोगों से मिले। उनसे सीधी बातचीत की। ई-रिक्शा बांटे। जनता से सीधे संवाद किये। क्या कहेंगे इस बारे में?

अरे, उनकी यह कृपा है क्या? उन्होंने कितने लोगों को रोजगार दिया? कितने कारखाने-उद्योग खुलवाये? बनारस के कितने लोगों के खातों में पैसे डलवाये? बुनकरों और हथकरघों की बातें तो बहुत करते हैं, कहां है बुनकर सेवा केन्द्र, कहां गया टे्रड सेंटर? कितने बुनकरों के हालात सुधारे? बतायें।

आप का कहना है कि कुछ काम नहीं हुआ है?

मेरा कहना नहीं है, यही सचाई है। देखिये, काम करने वाले काम करते हैं। जो बातों-वादों के सौदागर हैं वे बातें करते हैं। हमारे मुख्यमंत्री काम करते हैं, वे बातें नहीं करते। इन्हें मां गंगा ने बुलाया था। भईया, आप आ तो गये, लेकिन 27 महीनों में मां के लिए किया क्या? हमारे मुख्यमंत्री ने तो वरुणा के बारे में कोई डींग नहीं हांकी, लेकिन ‘वरुणा कॉरीडोर’ का आधा काम हो गया। बाकी आधा काम दिसंबर तक हो जायेगा। बनारस से लखनऊ ‘एक्सप्रेस वे’, लखनऊ से आगरा एक्सप्रेस वे, लखनऊ से बलिया एक्सप्रेस वे का काम राज्य सरकार कर रही है, वह दिख रहा है। बाबतपुर से भदोही फोर लेन राज्य सरकार ने बना दिया। बीएचयू के चारों ओर रिंग रोड, बीएचयू से कैंट स्टेशन तक रिंग रोड, चौकाघाट से लहरतारा तक फ्लाई ओवर, सामने घाट का पुल अक्टूबर तक तैयार हो जायेगा। ये बातों के पुल नहीं, यथार्थ में हुए हैं, करने से हुए हैं।

भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री के प्रोजक्ट में राज्य सरकार अडंग़े लगा रही है। यह कितना सच है।

वे बतायें तो सही कहां, किस प्रोजेक्ट में अड़ंगे लगाये गये हैं?

रिंग रोड के प्रोजेक्ट में स्टेट के अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे, ऐसा भाजपा के  मेयर मोहले जी, शहर उत्तरी के विधायक रवीन्द्र जायसवाल का कहना है।

मैंने कहा न, ये कुछ भी कह सकते हैं। ये भगवान से झूठ बोल सकते हैं तो आदमी से बोलने में क्या हिचक। अडंग़ा तो हमारे प्रोजेक्ट में केन्द्र सरकार लगा रही है। मड़ुवाडीह के फ्लाई ओवर के तीन पिलर का काम बारह  महीने से रुका है। आरओबी में इन्होंने (रेलवे) अडंग़ा लगाया है। वाराणसी नगर निगम पर भाजपा का 30 साल से कब्जा है। बिजली, पीने का पानी, सीवर जल निकासी के लिए, कूड़ा उठाने के लिए रोज प्रदर्शन हो रहे हैं। मेयर साहब का हाथ किसने बांध रखा है? कहां हैं इनके ‘नवरत्न’।

प्रधानमंत्री वाराणसी के ग्राम प्रधानों को दिल्ली बुलाकर मिल रहे हैं, यहां की समस्याओं को सुन रहे हैं। यह तो अच्छी बात है?

अच्छी बात तो है, लेकिन वे सिर्फ दो विधानसभा क्षेत्रों -सेवापुरी, रोहनियां (सेवापुरी से सुरेन्द्र पटेल, रोहनियां से उनके भाई महेन्द्र पटेल सपा के विधायक हैं) के ही प्रधानमंत्री नहीं, भारत के प्रधानमंत्री हैं। फिर केवल दो क्षेत्रों के प्रधानों को बुलाकर संवाद के मायने क्या है? उनके गुजरात के विभिन्न शहरों का भ्रमण कराने का क्या मतलब? असल में उनकी नीयत में खोट है। ये देश का विकास तो करने आये नहीं। बातें बनानी थीं बना दीं। प्रधानमंत्री बनना था, बन गये। बनारस से और मां गंगा से क्या लेना-देना?

बनारस के विकास के दर्जन भर प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। काम की गति धीमी हो सकती है, नीयत में खोट की बात भाजपा के लोग नहीं स्वीकार करते?

वे नहीं मानेंगे। वे तो अयोध्या में राम को भूल गये, काशी में गंगा को भूल गये हैं। बेरोजगारों को रोजगार देने की बातें भूल गये। महंगाई दूर करने का वादा भूल गये। गरीब आदमी 225 रुपए किलो में दाल खरीद रहा है, इससे अच्छे दिन और क्या आयेंगे। भईया, हम कहते हैं, आप हमारे बुरे दिन ही लौटा दो, हम उसी में खुश रह लेंगे। आपके ‘अच्छे दिन’ आप को मुबारक हो।


फिलहाल, भाजपा के लोग उत्साहित हैं और इस बात पर पूरा जोर देते हैं कि अगले तीन वर्षों में काशी की काया पलट जायेगी। राम गोपाल मोहले इसको बार-बार रेखांकित करते हैं कि ‘काशी का विकास उसकी पौराणिकता को बरकरार रखते हुए करना है। इसलिए बहुत सारी बातों का ध्यान रखा जा रहा है। जापान के शहर क्योटो को मॉडल के तौर पर सामने रखकर यहां काम हो रहा है। पुरातात्विक खासियत बरकरार रखते हुए आधुनिकता का समावेश हो यह कोशिश है।’

बनारसी साड़ी की पहचान पूरी दुनिया में है। लेकिन अगर बनारसी साड़ी उद्योग पर नजर डालें तो उसकी लचर हालत किसी से छिपी नहीं है। केन्द्र और प्रदेश की सरकारें इस बीमार उद्योग को बैसाखी के सहारे कई बार चलाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन मूल मर्ज कुछ और एवं इलाज कुछ और होने की वजह से कोई फायदा नहीं हुआ। अत: इधर के कुछ वर्षों में यह मुद्दा भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। मोदी जी ने चुनाव से पहले जर्जर हुए बनारसी साड़ी उद्योग की बेहतरी और बुनकरों को उनके अच्छे दिन लाने का वादा भी किया था। इस सवाल पर कि ‘बनारसी साड़ी और बुनकरों के दिन बहुरने में कितना विलम्ब लगेगा ‘रवीन्द्र जायसवाल कहते हैं – बड़ा लालपुर में 280 करोड़ की लागत से बुनकर सुविधा केन्द्र बन रहा है। इसी महीने (अगस्त) यह पूरा हो जायेगा। इस केन्द्र में बनारसी साड़ी उद्योग से संबधित सारी गतिविधियां-तकनीकी दक्षता, वाणिज्यिक और व्यापारिक विमर्श आदि चलेगा। बनारसी साड़ी की डिजाइन में सुधार के लिए वीविंग केन्द्र में निफ्ट का स्टेशन काउंटर खोला गया है। हैंडलूम, पावरलूम और जकाता के लिए केन्द्र अनुदान दे रहा है, जिससे बुनकर अपना कौशल विकास कर सकें। निश्चित ही कुछ दिनों में इन योजनाओं का असर दिखने लगेगा।


जयापुर के लिए कौन जिम्मेदार


11-09-2016

प्रधानमंत्री ने बतौर सांसद जयापुर गांव को गोद लिया है। इस गांव के विकास का जिम्मा मोदी जी के तीन मंत्रियों के हाथ में है। इसके अलावा गुजरात के एक सांसद भी यहां का विकास कर रहे हैं। गांव में लगभग सभी घरों में शौचालय बन गये हैं। लेकिन दो हिस्से शौचालय इन दिनों खराब हो चुके हैं। ग्रामीण उनका उपयोग न कर बाहर शौच के लिए जा रहे हैं। गांव में बनी सड़के बारिश में ध्वस्त हो गयी हैं। उनकी ईंटें टूट-फूटकर किनारे लग गयी हैं। गांव के ही राजाराम का कहना है कि काम करने और कराने वाले गुजरात के ही लोग थे। काम की क्वालिटी देखने आये सीडीओ पुलकित खरे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गांव की सभी सड़कें धंस गयी हैं। तीस प्रतिशत ग्रामीण खुले में शौच जा रहे हैं। सभी काम सीएसआर के जरिए हुआ है।


दावे और प्रतिदावे अपनी जगह हैं, लेकिन जो दिखता है वह है रेलवे क्षेत्र में पूर्वांचल में हुआ काम। हालांकि रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा पूर्वी उत्तर प्रदेश में किये गये कामों की चर्चा पर प्राय: एक ही जवाब देते हैं – ‘बात नहीं, काम बोलेगा। जो विकास रेल क्षेत्र में हुआ है, उसे लोग खुद देख रहे हैं।’ यह सच है कि पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद पहली बार लग रहा है कि बनारस, गाजीपुर, बलिया, इलाहाबाद, जौनपुर और गोरखपुर रेल के नक्शे में अपनी कोई अहमियत रखते हैं। बनारस में मडुवाडीह, वाराणसी सिटी दो नये रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन के समांनांतर खड़े हुए हैं। हालांकि ये दोनों स्टेशन पहले भी थे, लेकिन अब इनकी शक्ति और सामथ्र्य दोनों बढऩे से पूर्वाचल की जनता को बहुत लाभ मिल रहा है। प्रो. सुरेन्द्र प्रताप कहते हैं -‘मनोज सिन्हा ने सचमुच पूर्वांचल को दो वर्षों में काफी कुछ दिया है।’

बनारस से सियाराम यादव

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