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सब के लिए परिवार, मोदी जी के लिए?

0 February 10, 2019

बेटा: पिताजी। पिता: हां, बेटा। बेटा: पिताजी, दुनिया बदल जाएगी लेकिन आप नहीं बदलेंगे। पिता: अब क्या हो गया? बेटा: पिताजी, सारी दुनिया ने अपनी-अपनी पार्...

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एक आदर्श चुनाव घोषणा पत्र

0 January 27, 2019

भारत एक ऐसा देश है जहां हर चीज का मौसम होता है—गेहूं का, चावल का, आम का, संगत्रे का, अंगूर का, गोभी, गाजर का, भिंडी का और बहुत कुछ का। पर यहाँ चुनाव क...

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‘एैक्सीडैंटल प्राईम मिनिस्टर’ पुस्तक ठीक, फिल्म गलत

0 January 10, 2019

बेटा: पिताजी। पिता: हां बेटा। बेटा: क्या मेरे कानूनी व संविधानिक अधिकार और हैं, आपके अलग, नेताओं के अलग,  महिलाओं के अलग, पुरूषों के अलग, गरीबों के अल...

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चुनाव के चोंचले धर्म, कर्म व गोत्र

0 December 20, 2018

बेटा : पिताजी। पिता : हां बेटा। बेटा : हमारा संविधान तो पंथनिर्पेक्ष है न? पिता : बिलकुल। बेटा : और चुनाव में अपनी जाति और पंथ के आधार पर वोट मांगना भ...

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दिल्ली तो दिल्ली ही है

0 March 9, 2018

बेटा: पिताजी। पिता: हां बेटा। बेटा: पिताजी, मैं दिल्ली घूम आया। पिता: क्या देखा? आया कुछ मजा? बेटा: बहुत मजा आया पिताजी। पिता: तो फिर बता क्या खाास दे...

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जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म

0 February 17, 2018

शर्म नाम की चीजें हमारे देश से लुप्त होती जा रही है। यह तो अच्छा लक्षण है। राजनीति के लोगों के लिए तो यह बहुत अच्छी चीज है। यदि राजनीति के लोग जरा-जरा...

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भाषणबाजी एक कला भी, शस्त्र भी

0 January 14, 2018

भाषणबाजी भी एक कला है। कला ही नहीं, राजनीति के महारथियों के हाथ तो कई बार  ब्रह्मास्त्र भी साबित हो जाती हैं। उनके पास और कुछ हो या न हो, वह अपने प्रत...

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पत्नीयों के किस्से मर्दां की जुबानी

0 October 22, 2017

सच्चाई तो यह है कि जब मर्द अपनी घरवालियों की गैरहाजिरी में हलके-फुल्के माहौल में बैठते हैं तो बीवियों के चटकारे लेते हैं और जब बीवियां मिल-बैठती हैं त...

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क्यों न ईश्वर ही बन बैठू?

0 October 5, 2017

मैं बहुत शर्मिंदा हूं कि मैं जीवन में अभी तक कुछ नहीं कर पाया हूं। शर्म की बात तो यह है कि मैं राजनीति में भी जम नहीं पाया हूं। निकम्में से निकम्में ल...

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