ब्रेकिंग न्यूज़

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राष्ट्र की प्रगति के लिए हिन्दी की सर्वस्वीकार्यता आवश्यक

0 October 4, 2019

मनुष्य के जीवन की भांति समाज और राष्ट्र का जीवन भी सतत विकासमान प्रक्रिया है। इसलिए जिस प्रकार मनुष्य अपने जीवन में सही-गलत निर्णय लेता हुआ लाभ-हानि क...

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दिलीप सिंह राठौड़ : कर्मठ नेता

0 October 4, 2019

दिलीप सिंह राठौड़ एक सामान्य राजपूत परिवार में जन्मे। प्रबल राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत श्री राठौड़ ने राष्ट्रीय उत्थान में समाजवाद के  महत्व को पह...

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ओडिशा के रसगुल्ले को मिली मान्यता

0 August 7, 2019

रसगुल्ले का जिक्र हो और मुंह में पानी न आये ऐसा हो सकता है क्या? मीठी चाशनी में घुला-मिला रसगुल्ला अपने आप में मिठास का प्रतीक है। क्या इसे लेकर कोई झ...

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चातुर्मास: भारतीय संस्कृति में अनूठा आध्यात्मिक अनुभव

0 July 24, 2019

श्रमण, वैदिक व बौद्ध संस्कृति में चतुर्मास की व्यवस्था है। धर्म व धर्म पथ पर चलने वाले संत साधु अहिंसा और जीवदया की भावना से चार माह तक एक स्थान पर रह...

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आज मैथिलीशरण गुप्त की आवश्यकता ञ्चयों

0 July 24, 2019

देश के सर्वाधिक पिछड़े क्षेत्रों में से एक बुन्देलखण्ड की धरती पर चिरगांव में जन्मा साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति समूचे राष्ट्र को अपनी लेखनी से उद्धेल...

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सबसे प्यारा शब्द मां

0 May 17, 2019

मां शब्दकोश का ही नहीं अपितु जीवन के वाड्मय का भी सबसे प्यारा शब्द है। शिशु के मुख से सबसे पहले यही एकाक्षरी शब्द फूटता है। यद्यपि मां के अतिरिक्त मात...

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भगवान महावीर की अहिंसा से आतंकवाद का खात्मा संभव

0 April 15, 2019

जैन परम्परा के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर हैं भगवान महावीर। आपको वद्र्धमान, सन्मति, वीर, अतिवीर के नाम से भी जाना जाता है। ईसा से 599 पूर्व कुण्डलपुर मे...

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संस्थाओं का सम्मान और संस्थाओं की अवमानना दो परस्पर विरोधी अप्रोच

0 April 1, 2019

वह 2014 की गर्मियों के दिन थे, जब देशवासियों ने निर्णायक रूप से मत देकर अपना फैसला सुनाया: परिवारतंत्र को नहीं, लोकतंत्र को चुना। विनाश को नहीं, विकास...

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जब एक मुट्ठी नमक ने अंग्रेजी साम्राज्य को हिला दिया

0 March 30, 2019

89 वर्ष पहले आज ही का वो दिन था, जब बापू ने ऐतिहासिक दांडी मार्च की शुरुआत की थी। हालांकि, दांडी मार्च अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण नमक कानून का विरोध करन...

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राजनैतिक, दूरदर्शी, एकात्म मानववाद के पोषक

0 February 20, 2019

पंडित दीनदयाल उपाध्याय उन दूर द्रष्टाओं में से एक थे जिन्होंने बृहस्पति, चाणक्य और विवेकानन्द की भांति आधुनिक राजनीति को पारदर्शी और शुद्धता के अनुसार...

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