ब्रेकिंग न्यूज़

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गोपालकृष्ण गोस्वामी श्रीकृष्ण भक्ति के शिखर पुरूष

0 December 29, 2016

श्रीकृष्ण के इस लोकनायक चरित्र ने ही उन्हें सार्वभौमिक लोकप्रियता प्रदान की। संसार की अधिकांश भाषाओं में गीता के अनुवाद के साथ कृष्ण की लीलाओं का यशोग...

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अवधूत बाबा शिवानंदजी तेजस्विता की ऊंची मीनार

0 December 16, 2016

यह भारत का सौभाग्य है कि यहां की रत्नगर्भा माटी में महापुरुषों को पैदा करने की शोहरत प्राप्त है। ज्ञात इतिहास के पन्नों पर दृष्टिपात करते हैं, तो ऐसे ...

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मुनि तरुणसागर क्रांतिकारी राष्ट्रसंत

0 December 1, 2016

भारत का इतिहास संतों और मुनियों की गौरवमयी गाथाओं से भरा है। इस देश की धरती पर अनेक तीर्थंकर, अवतार, महापुरुष एवं संतपुरुष अवतरित हुए जिन्होंने अपने व...

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आचार्य विजय रत्नसुंदरसूरि संत-साहित्य के पुरोधा

0 November 4, 2016

भारतीय ऋषि परम्परा एवं संस्कृति में साहित्य का विशेष महत्व है क्योंकि शब्दों का सीधा प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। भारत की साहित्यिक परंपरा में ...

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नन्दकिशोर शर्मा ‘नन्दूजी’ श्री श्याम भक्ति का अनूठा सूरज

0 October 6, 2016

भारतीय परम्परा एवं संस्कृति में भजनों एवं भक्ति-संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका है। भजन और भक्ति संगीत मन को ही नहीं हमारी आत्मा को छू कर हमारे जीवन को पवि...

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रमेश भाई ओझा क्रांतिकारी योद्धा

0 September 22, 2016

भारतीय परम्परा एवं संस्कृति में ऋषियों एवं धर्मगुरुओं के कथा-प्रवचनों एवं व्याख्यानों का विशेष महत्व है क्योंकि शब्दों का सीधा प्रभाव व्यक्ति के जीवन ...

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गणि राजेन्द्र विजय पथ प्रदर्शक

0 September 8, 2016

हमारी भारत भूमि पर बहुत से लोग ऐसे हैं जो जन्म तो लेते हैं पर जीवन को जी नहीं पाते, जीवन को ढोते हैं। क्योंकि, जीवन की मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और ...

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संत श्री मोरारी बापू जिनका जीवन है तनावों की भीड़ में शांति का संदेश

0 August 26, 2016

धार्मिक जगत के इतिहास में संत श्री मोरारी बापू इस शताब्दी के एक दुर्लभ व्यक्तित्व हैं। उनकी जीवनगाथा भारतीय चेतना का एक अभिनव उन्मेष है, आश्चर्यों की ...

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ध्यान गुरू अर्चना दीदी अशांति के कोलाहल के बीच शांति के स्वर

0 August 12, 2016

सृजन में शोर नहीं होता। साधना की जुबान नहीं होती। किंतु सिद्धि में वह शक्ति होती है कि हजारों पर्वतों को तोड़कर भी उजागर हो उठती है। यह कथन ध्यानगुरु ...

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आचार्य महाश्रमण निर्गुण रंगी चादरिया से कोई ओढ़े संत सुजान

0 July 28, 2016

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को हिदायत दी है, कि तुम गुण ही गुण में वर्तन करते हो, जिससे अनेेक उर्मियों के बीच ही मन नर्तन करता रहता है। इस नर्तन...

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